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शब्द ॥ 9 ॥

ओ३म्‌ दिल साबत हजकाबो नेडै। क्या उलबंग पुकारो॥

भाई नाऊं बलद पियारो। ताकै गलै करद क्यूं सारो।

बिन चीन्हैं खुदाय बिबरजत। केहा मुसलमानो॥

काफर मुकर होयकर राह गुमायो। जोय जोय गाफल करै धिगाणों॥

ज्यू थे पच्छिम दिशा उलबंग पुकारो। भलजे यों चीन्हों रहमाणों॥

तो रूह चलंतै पिण्ड पड़तै॥

आवै भिस्त बिमाणों। चढ़चढ़ भींते मड़ी मसीते। क्या उलबंग पुकारो॥

कांहे काजै गऊ बिणासो। तो करीम गऊ क्यूं चारी॥

काहीं लीयो दूधूं दहियूं। काहीं लीयो घीयूँ महियूं॥

काहीं लीयूं हाडूं मासूं। काही लीयूं रक्तूं रूहियूं॥

सुणरे काजी सुणरे मुल्लां। यामै कौण भया मुरदारूं॥

जीवां ऊपर जोर करीजै। अंतकाल होयसी भारूं॥९॥









शब्द ॥ 10 ॥

ओ३म्‌ बिसमिल्ला रहमान रहीम। जिहिंकै सदकै भीना भीन॥

तो भेटीलो रहमान रहीम। करीम काया दिल करणी॥

कलमा करतब कौल कुराणों। दिल खोजो दरबेश भईलो॥

तइया मुसलमाणों। पीरां पूरषां जमी मुसल्लां॥

कर्तब लेक सलामों। हम दिल लिल्ला तुम दिल लिल्ला। रहम करै रहमाणों॥

इतने मिसले चालो मीयां। तो पावो भिस्त इमाणों॥१०॥







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