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शब्द ॥ 68 ॥
ॐ वै कवराईं अनंत बधाई ।
वै कवराई स्वर्ग बधाई ॥
यह कवराई खेह रलाई ।
दुनिया रो लै कंवर किसो ॥
कण बिन कूकस रस बिन बाकस बिन किरिया परिवार कसो ॥
अरथूं गर्थूं साहण थाटूँ ।
धुंवे का लह लोर जिसो ॥
सो सारग्ड़धर जपरे प्राणी ।
जिंहिं जपीय हुवै धर्म इसो ॥
चलण चलंते बास बसंतैं ।
जीव जीवन्ते ॥
काया नवन्ते सास फुरन्तै ॥
किंवीं न कमाई तातैं जबर बिनड़सी रे भाई ।
सुरनर ब्रह्मा कोऊ न गाई ॥
माय न बाप न बहण न भाई ।
इत न मित न लोक जणो ॥
जबर तणों जमदूत दहेला लेखो लेसी ऐक जणो ॥
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