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शब्द ॥ 62 ॥

ॐ नामैं कारण किरिया चूक्या ।

नामैं सूरज साम्हे थूक्यो ॥


नामैं ऊभैं कांसां मांज्या ।

नामैं छान तिणुका खीच्या ॥


नामैं ब्राह्मण नवत बहोड़या ।

नामैं आवा का रंभ चुरायो ॥


नामैं बाड़ी का बण फल तोड़या ।

नामैं जोगी का खप्पर फोड़या ।


नामैं ब्राह्मण का तागा तोड़या ।

नामैं बैर विरोध धन लियों ॥


नामैं सुवा गाय का बच्छा बिछोड़या ।

नामैं चरती पिवती गऊ बिडारी ॥


नामैं हरी पराई नारी ।

नामैं सगा सहोदर मारया ॥


नामैं तिरिया शिर खड़ग उभारया ।

नामैं फिरते दाँतन कियो ॥


नामैं रण मैं जाय दो दियों ।

नामैं बाट कूट धन लीयों ॥


एकजू औगुण रामैं कीयों ।

अण होतो मृगो मारण गइयों ॥


आज्ञा लोप जु तुम्हरी हुइयों ॥


दूजौ औगुण रामें कियों । ऐको दोष अदोषा दीयों ।

बनखण्ड में जद साथर सोइयों । जदको दोष तदको हुइयों ॥





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