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शब्द ॥ 58 ॥
ॐ तउवा माण दुर्योधन माण्या ।
अवर भी माणत माणूं ॥
तउवा दान जू कृष्णी माया ।
और भी फूलत दानों ॥
तउवा जाण जु सहस्त्र झूभया ।
और झूझूत जाणो ॥
तउवा बाण जु सीता कारण लक्ष्मण खैंच्या ।
और भी खैंचत बाणौं ॥
जपी तपी तक पीर ॠषिश्वर ।
तोल रह्या शैतानो ॥
तिण किण खैंच न सकै शंभू तणी कमाणों ।
तेऊं पार पहुंता नाहीं ।
ताकी धोती रही असमाणे ॥
बारां काजे हरकत आई ।
अध बिच मांडयो थांणो ॥
नार सिंह न राज नरवो ।
सुराज सुर वो ॥
नरां नरपति ।
सुरां सुरपती ॥
ज्ञान नरिंदो ।
बहू गुण चिन्दो ।
पहलू प्रहलादा आप पत लीयो ।
दूजा काजै काम बिटलियो ॥
खेत मुक्त ले पञ्च करोड़ी ।
सो प्रहलादा गुरु की बाचा बहियों ॥
ताका शिखर अपारूं ॥
ताकी तो बैकुण्ठे बासो ।
रतन कायादे सौंप्या छलत भंडारुं ॥
तेउ तो उर बारे थाणो ।
अई अमाणो ॥
तत्व समाणो ।
बहु प्रमाणो ॥
पार पहूंचण हारां ।
लंका के नरशूर संग्रामे घणा बिरामें ॥
काले काने भला तिकंट ।
पहलै झूभया बाबर झंट ॥
पड़ै ताला समँद पारी ।
तेउ रहीया लंक द्वारी ॥
खेत मुक्त ले सात करोड़ी ।
परशुराम के हूक्म जे मुवा ॥
सेतो कृष्ण पियारा ।
ताको तो बैकुण्ठ बासो रतन काया दे सोंप्या छलत भंडारूं ।
तेउ तो उरबर थाणो ॥
अई अमाणो पार पहूंचण हारा ।
काफर खानों बुद्धि भराड़ो ॥
खेत मुक्त ले नव करोड़ी राव युधिष्टर ॥
सेतो कृष्ण पियारा ।
ताको तो बैकुण्ठे बासो रतन कायदे सौंप्या छलत भण्डारूं ।
तेउ तो उरबारे थाणो ॥
अई अमाणो ॥
बहु प्रवाणो ।
पार पहूंचन हारा ॥
बारा काजै हरकत आई ।
ताते बहुत भई कसवारूं ॥
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