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शब्द ॥ 45 ॥
ॐ दोय मन दोय दिल सींवीं न कँथा ।
दोय मन दोय दिल पुली न पँथा ॥
दोय मन दोय दिल कही न कथा ।
दोय मन दोय दिल सुनी न कथा ॥
दोय मन दोय दिल पँथ दुहेला ।
दोय मन दोय दिल गुरु न चेला ॥
दोय मन दोय दिल बंधी न बेला ।
दोय मन दोय दिल रब्ब दुहेला ॥
दोय मन दोय दिल सुई न धागा ।
दोय मन दोय दिल भिड़ै न भागा ॥
दोय मन दोय दिल भेव न भेऊं ।
दोय मन दोय दिल टेव न टेऊं ॥
दोय मन दोय दिल केल न केला ।
दोय मन दोय दिल स्वर्ग मेला ॥
रावल जोगी तां तां फिरयों ।
अण चीन्हें के चाहौं ॥
चाहे काजै दिशावर खेलो ।
मन हठ सीख न कायों ॥
थे जोग न जोग्या भोग न भोग्या ।
गुरु न चीन्हौ रायों ॥
कण बिन कूकस कांय पीसो ।
निश्च्य सरी न कायों ॥
बिन पायचिये पग दु:ख पावैं ।
अवधू लौहे दु:खी सकायों ॥
पारब्रह्म की शुद्ध न जांणी ।
तो नागे जोग न पायों ॥
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