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शब्द ॥ 37 ॥
ॐ लोहा लंग लुहारूं ठाठा घड़ै ठठारूं ।
उतम कर्म कुम्हारूं ॥
जइया गुरु न चीन्हौं ।
तइया सींचा न मूलूं ।
कोई कोई बोलत थूलूं ॥
शब्द ॥ 38 ॥
ॐ रे रे पिंडस पिंडू ।
निरध्न जीव क्यों खणडू ॥
ताछै खण्ड बिहणड़ूं घडिय से घमणड़ूं ॥
अइया पंथ कूपँथू ।
जइया गुरु न चीन्हौ ।
तइया सींचा न मूलूं ।
कोई कोई बोलत थूलूं ॥
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