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शब्द ॥ 26 ॥
ॐ घण तण जीमें को गुण नांही ।
मल भरिया भंडारूं ॥
आगे पीछे माटी झुलै ।
भूला बहैज भारुं ॥
घणा दिना का बड़ा न कहिबा ।
बड़ा न लंघिबा पारूं ॥
उतम कुली का उतम न होयबा ।
कारण क्रिया सारूं ॥
गोरख दीठा सिद्ध न होयबा ।
पोह उतरिबा पारूं ॥
कलजुग बरतै चैतो लाई ।
चैतौ चैतण हारुं ॥
सतगुरु मिलियो सतपंथ बतायो ।
भ्रांति चुकाई बिदगाराते उदगा गारूं ॥26॥
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