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शब्द ॥ 24 ॥
ॐ आसन बैसण कूड़ कपटण । कोई कोई चीन्हत बौजू बाटे ॥
बौजू बाटे जे नर भया ।
काची काया छोड़ कैलाशै गया ॥
शब्द ॥ 25 ॥
ॐ राज न भूलीलो ।
राजैन्द्र दुनी न बंधै मैरूं ॥
पवणा झोलै बीखर जैला ।
धुंवर तणा जै लोरूं ॥
बोलस आभै तणा लहलोरूं ।
आडा डंबर कैती बार बिलंबण यो संसार अनेहुं ॥
भूला प्राणी विष्णु न जंप्यो ।
मरण बिसारो केहूं ॥
महां देखंता देव दाणूं सुर नर खीणा ।
जंबू मंझे राचि न रहिबा थेहूं ॥
नदिये नीर न छीलर पाणी ।
घूंवर तणा जे मेहूं ॥
हंस उडाणो पंथ विलम्बयो ।
आशा श्वाश निराश भईलौ ॥
ताछै होयसी रंड निरंडी देहूं ।
पवणा झौले बीखर जैलां गैण बिलंबी खेहूं ॥25॥
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