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शब्द ॥ 119 ॥
ॐ विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी ,पैंके लाख उपाजूं ।
रतन काया बैकूण्ठे बासो तेरा जरा जरण भय भाजूं ॥
शब्द ॥ 120 ॥
ॐ विष्णु विष्णु तूं भण रे प्राणी ,इस जीवन के हावै ।
क्षण क्षण आव घटंती जावे ,मरण दिनों दिन आवै ।
पालटीयो घट कांय न चेत्यो , घाती रोल भनावै ।
गुरु मुख मुरखा चढै न पोहण , मन मुख भार उठावै ।
ज्यों ज्यों लाज दुनी की लाजै ,त्यों त्यों दाब्यो दाबै ।
भलिया हो सो भली बुध आवै ,बुरिया बुरी कमावे ॥
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