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साखी |4|
अहरण नाहिं हथोड़ा नाहिं, पाणी सूं खालक राजा पिंड घड़े रे।
नाकै सास लेवो मुख बोलो,श्रवणे सांभलो ज्यों सुरति पड़े रे ।
नेण चलण रतनागर दीना,कौण स दाता देव बड़े रे।
विष्णु विष्णु तूं जप रे जीवड़ा अबकै आयो जन्म रूड़े रे।
ले माला हरि जाप ने कियो,जपतां री मुख जीभ अड़े रे।
पापां रो पसायो जीवड़ा दौरे जैलो, उत कण अफरी तेरे मार पड़े रे ।
गाडरियो हुवैयो कीच में पडेलो, झाटकणां री थारे झूर पड़े रे।
करवलियो हुवैलो फिरैलो कतारां, मार उठावे लड़े छड़े रे ।
दसां मणां री तेरे गूण पडेलो, ऊपर ओठी कूद चड़े रे ।
हाली के घर, धोरी हुवैलो, मार सहेली तीखी गड़े रे ।
ओड़ा के घर पूहणियों हुवलै, ले ले बोरी पाल चड़े रे ।
सुअरियो हुवैलो शहरै फिरलै, ठरड़क ठरड़क तेरी नास करे रे।
कूकरियो हूवैलो गलियाँ में फिरैलो आवे बटाऊ झबक लडे रे ।
कंवलियो हुवैलो गिगन भुंवैलो। कुरंग उपर तेरी चांच पड़े रे ।
जब लग जीवड़ा तैं सुकरत न कियो, ज्यूं ज्यूं नान्ही जूण पड़े रे।
ऊदो भणे रे जपो निज नामी, देव नहीं कोई जंभ धड़े रे ।
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