|
|
भजन |4|
अमरलोक सूं म्हारा जाम्भेजी पधारिया, घर लोहट अवतार लियो।
सिरिय झिमाबाई करे थारी आरती, चंवर डुलावे आलम सालम जीओ।
सोनेरे सिंहासन माथे जाम्भेजी विराजिया, भगत उतारे थारी आरती जीओ।
जींझा मजीरा थारे बाजे मंदिर में, झालर री झणकार जीओ।
नौपत नगारा थारे गहरा-गहरा बाजे, शंख रा बाजे तूंताड जीओ।
घिरत गुगल थारे चढे मिठाई,आवे कपूर महकार जीओ॥॥
प्रेमभाव से थाने, मनावे, निवण करे नरनारी जीओ॥॥
खुलाथारा पड़िया पोल दरवाजा, धोक लगावे नर नारी जीओ॥।
केर कुमटिया चोखा घणा लागे, औ फोगां री झाड़ी जीओ॥॥
|