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भजन |3|
गाओ-गाओ ए सहियां म्हारी गीतड़ला, मुराली गाओ ए मुकाम। सुणेला थारी जाम्भेजी टेक
गढ़ चित्तौड़ ए जाम्भेजी पधारिया, झाली राणी रो दुख दियो मेट। सुणेला थारी जाम्भेजी॥
सासां जिणरा ए पल माही काटिया, सुण जाम्भेजी ग्यान। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
रावण गोविन्द ए जलरा प्यासिया, बादल दियो वरसाय। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
शहर फलोदी रा ए राव हमीरजी, ज्यारी दीन्ही तपत बुझाय। सुणेल थाली जाम्भेजी॥॥
वील्हो खाती ए रेवाड़ी शहर रो, ज्यानें सुरगा दी पहुचाया। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
बाजे जी भगत रो ए दुखडो निवासियो, बेटो दियो जवान। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
अलू चारण री ए व्यथा मिटाय दी, ज्यांरो काटयो जलोदर रोग। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
सिरिया झमकू ए जाम्भेजी री चोलियां, ज्यांने सुरगां दी पहुचाया। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
इण तीन लोक में ए बाने मत भूलज्यो, घर घर करो प्रचार। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
अमर सुहागण ए जाम्भेजी राखेला, भरिया राखेला भण्डार।सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
गावे ज्यारां ए पाप झड़ पडै । आवागमण मिटाजाय,सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
हरजस कथियों ए सूरजाराम ने, राख पूरो विश्वास। सुणेला थाली जाम्भेजी॥॥
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