भजन |2|

ठुमक ठुमक देखो आवे जम्भराज, हंसा जो मगन भई देख्यों ऐसो साज।

आगे आगे गऊआं चाले पीछे ग्वाल। सारां बीच हंसा लोहटजी रो लाल।

आवत देखी गऊआं नगर की नार, हंसा आगे सखियां करे पुकार॥॥

सिर पे सुहावे टोपी गले काली माल, कान्धे पर गेडी चाले अद्भूत चाल॥।

बोले नहीं मुखड़ै सूं करे सब काज, लीला ज्यांरी लखी नहीं पीपासर समाज॥॥

पूर्ण ब्रह्‌मा रूप धार लियो भेष, पार नहीं पावे ब्रह्‌मा विष्णु महेश॥॥

ओही लोहट सुत ओही कृष्णमुरार, सेवक आत्मा गुण रहयो उचार॥॥














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